mukesh sulakhiya
mukesh sulakhiya
सुलगते ख्वाबों पर पलकों का पहरा हैं
भोर होते ही जमीनी हकीकत ने घेरा हैं ......
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एक बार मोहब्बत करके देखो ज़ख्मों से
कायल हो जाओगे इनकी वफ़ाओं के ...
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जो आधार हैं एक परिवार की
वो बोझ है सीने पर माँ - बाप के....
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दिन की सफेद चादर पर धब्बा हैं जो काला

Ya Ya mukesh
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